BSEB 11th hindi 3.मीराबाई पद
मीराबाई पद-1 जो तुम तोड़ो, पिया मैं नहीं तोड़ूँ । तोसों प्रीत तोड़ कृष्ण ! कौन संग जोड़ूँ ।। तुम भये तरुवर मैं भई पँखिया । तुम भये सरवर मैं तेरी मछिया ।। तुम भये गिरिवर मैं भई चारा । तुम भये चंदा मैं भई चकोरा ।। तुम भये मोती, प्रभु हम भये धागा । तुम भये सोना हम भये सोहागा ।। मीरा कहे प्रभु ब्रज के बासी । तुम मेरे ठाकुर मैं तेरी दासी ।। भावार्थ- मीराबाई द्वारा रचित इस पाठ में मीरा एवं कृष्ण के प्रेम भाव विशेष रूप से व्यक्त किया गया है। लेखिका कहती है हे कृष्ण मैं आपसे प्रीत करती हूँ यानी की प्रेम करती हूँ चाहो तो तुम इस प्रेम बंधन यानी प्रीत को तोड़ सकते हो। लेकिन मैं नही तोरूंगी यदि मैं आपसे प्रीत तोड़ लेती हूँ तो फिर मैं प्रीत किससे जोडुंगी। आप हमसे प्रेम करो या न करो मैं तो आपसे प्रीत करूगीं। मीरा बाई कहती है कि हे कृष्ण अगर आप एक तरूवर (वृक्ष) है तो मैं उस वृक्ष पर निवास करने वाली चिड़िया हूँ। अगर आप एक तालाब है तो मैं उस तलाब में निवास करने वाली मछली हूँ अर्थात मीराबाई का कहना है कि मैं कृष्ण के बिना अधुरी हूँ ।आगे मीराबाई कहती है ठीक उसी तरह तुम एक पर्वत हो तो उस पर्व...