कर्मधारय समास

 कर्मधारय समास



जिस समास का उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद व उत्तरपद में विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का संबंध हो वह कर्मधारय समास कहलाता है। जैसे –

विशेषण–विशेष्य :

1. महाराज - महान है जो राजा

2. पीतांबर - पीत है जो अंबर

3. महावीर महान है जो वीर

4. महापुरुष महान है जो पुरुष

5. प्रधानाध्यापक प्रधान है जो अध्यापक

6. का पुरुष कायर है जो पुरुष

7. नीलकंठ नीला है जो कंठ

8. काली मिर्च काली है जो मैच

9. महादेव महान है जो देव

10. श्वेतांबर श्वेत है जो अंबर

11. सद्धर्म - सत्य है जो धर्म

12. नीलगगन नीला है जो गगन

13. अंधे को अंधा है जो को

1लालछड़ी- लाल है जो छड़ी

15. नीलांबर नीला है जो अंबर

16सज्जन - सत् है जो जन

17. कृष्णसर्प - कृष्ण है जो सर्प

18. महात्मा - महान है जो आत्मा

19 दुरात्मा - दुर् (बुरा)है जो आत्मा

20. कुबुद्धि - कु(बुरी) है जो बुद्धि

21. पर्णकुटी - पर्ण से बनी कुटी

उपमान–उपमेय:

1. देहलता - देह रूपी लता

2. चंद्रमुख -  चंद्र की समान मुख

3. विद्याधन - विद्या रूपी धन

4. कमलनयन - कमल के समान नयन

5. वचनामृत - अमृत के समान वचन

6.क्रोधाग्नि- क्रोध रूपी अग्नि

7. संसारसागर – संसार रूपी सागर

8. ग्रंथरत्न – ग्रंथ रूपी रत्न

9. करकमल – कर रूपी कमल

10. मृगलोचन – मृग के समान लोचन

11. चरणकमल – कमल के समान चरण

12. भुजदंड – दंड के समान भुजा

13. कनकलता – कनक के समान लता

14. घनश्याम – घन के समान श्याम (काला)

15. विद्याधन – विद्या रूपी धन

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