BSEB 11th hindi कबीर के पद भावार्थ व व्याख्या
कबीर के पद कक्षा 11 हिंदी BSEB पद-1 संतो देखत जग बौराना । साँच कहौं तो मारन धावै , झूठे जग पतियाना || नेमी देखा धरमी देखा, प्रात करै असनाना । आतम मारि पखानहि पूजै, उनमें कछु नहिं ज्ञाना ।। बहुतक देखा पीर औलिया, पढ़े कितेब कुराना । कै, मुरीद तदबीर बतावै, उनमें उहै जो ज्ञाना ॥ भावार्थ- लेखक कबीर जी कहते हैं कि देखो यह संसार के लोग पागल से हो गए हैं। अगर सच बोलो तो मारने के लिए दौड़ते हैं और झूठ बोलो तो सब कोई मान लेता है। बहुत ऐसे धर्म को पालन करने वालों को देखा जो सुबह उठते ही स्नान करते हैं। वे लोग जो अपने आत्मा को तकलीफ़ देते है या मारते हैं और पत्थरों की पूजा करते हैं। उनलोगों के पास किसी प्रकार का ज्ञान नहीं होता है वह अज्ञानी होते हैं। कबीर जी कहते हैं कि मैने बहुत ऐसे धर्म गुरू एवं संतो को देखा जो अपना धार्मिक किताब कुरआन पढ़ते हैं और अपने शिष्य एवं अपने छात्रों को अलग-अलग तरह-तरह के उपाय के बारे में बताते हैं जो उस पुस्तक में ज्ञान की बातें कही गई है। आसन मारि डिंभ धरि बैठे , मन में बहुत गुमाना । पीतर पाथर पूजन लागे , तीरथ गर्व भुलाना ।। टोपी पहिरे माला पहिरे , छाप...
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